Home लाइफ स्टाइल कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में प्रवासी कामगारों की मजबूरी दिखाती प्रतिमा,...

कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में प्रवासी कामगारों की मजबूरी दिखाती प्रतिमा, इसमें एक मां कार्तिकेय रूपी बच्चे को पकड़े हुए और दो बेटियों के साथ शक्ति रूप में खड़ी है


  • Hindi News
  • Women
  • Lifestyle
  • A Statue Depicting The Helplessness Of Migrant Workers In The Durga Puja Pandal In Kolkata, With A Mother Holding A Child Like Kartikeya And Standing In Power With Two Daughters

17 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • इस प्रतिमा के माध्यम से ये दिखाया गया है कि किस तरह एक मां अपने भूखे बच्चों के साथ तेज धूप में चली जा रही है
  • इस क्लब ने प्रवासी मां की व्यथा को मां दुर्गा की प्रतिमा के रूप में दिखाया है

मां दुर्गा के अनेक रूपों में से एक है प्रवासी मां का रूप। कोलकाता के बेहला इलाके में स्थित बड़िशा क्लब ने इसे प्रतिमा के रूप में प्रस्तुत किया है। देवी दुर्गा की गोद में कार्तिकेय रूपी बच्चे को दिखाया गया है। इस क्लब ने प्रवासी मां की व्यथा को मां दुर्गा की प्रतिमा के रूप में दिखाया है। इस साल महामारी की वजह से कई प्रवासी मजदूर अपने गांव वापिस लौट गए। इनमें बड़ी संख्या उन महिलाओं की भी थी जो अपने मासूम बच्चों के साथ पैदल ही लंबी दूरी की यात्रा करने को मजबूर हुईं।

इस प्रतिमा को बनाने का मकसद महामारी में प्रवासी कारीगरों का दर्द बयां करना है।

इस प्रतिमा को बनाने का मकसद महामारी में प्रवासी कारीगरों का दर्द बयां करना है।

प्रतिमा को बनाने वाले कलाकार रिंटू दास के अनुसार, ”इस प्रतिमा में एक महिला की गोद में बिना कपड़े पहने एक बच्चा है। इस प्रतिमा के माध्यम से ये दिखाया गया है कि किस तरह एक मां अपने भूखे बच्चों के साथ तेज धूप में चली जा रही है। वह अपने बच्चों के लिए पानी और खाने की व्यवस्था देख रही है। इस पंडाल के डेकोरेशन के लिए किसी से राशि नहीं ली गई है”।

पंडाल के संस्थापक सदस्य देबप्रसाद बोस ने कहा कोई भी पंडाल तालाबंदी के दौरान श्रमिकों की दुर्दशा को पूरी तरह नहीं बता सकता लेकिन हमने प्रवासी मजदूरों के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाने की कोशिश की है। मुझे याद है कि लॉकडाउन के दौरान टीवी और अखबारों में रोज ही यह खबर पढ़ने को मिली कि किस तरह प्रवासी कर्मचारी पैदल घर लौट रहे थे।

इस बार बड़िशा क्लब की मुख्य थीम भी 'रिलीफ' यानी राहत ही है।

इस बार बड़िशा क्लब की मुख्य थीम भी ‘रिलीफ’ यानी राहत ही है।

उनमें से कुछ सड़क पर मर रहे थे। मेरे कुछ दोस्त जो बंगाल से दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में चले गए, उन्होंने मुझे सड़कों पर परेशान हाल में घूमते हुए प्रवासी मजदूरों के बारे में बताया था। हालांकि उस वक्त दुर्गा पूजा में कुछ महीने बाकी थे। लेकिन बच्चों के साथ घर चलने वाली महिलाओं की इस भावना ने मेरे दिल को छुआ। मेरे मन में, उन्होंने देवी को अवतार लिया जिसे मैंने नवरात्रि पर इस प्रतिमा के माध्यम से बताया। वैसे भी इस बार बड़िशा क्लब की मुख्य थीम भी ‘रिलीफ’ यानी राहत ही है।



Source link

Must Read

जयपुर-पुणे, मरुधर एक्सप्रेस सहित चौदह ट्रेनों का संचालन बढ़ाया

जयपुर. ट्रेन से सफर करने वालों के लिए राहतभरी खबर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने बढ़ता यात्रीभार देखते हुए जयपुर-पुणे, मरुधर एक्सप्रेस, जयपुर-इंदौर सहित...

सर्दी से मिली राहत, माउंट आबू 3.4 डिग्री सेल्सियस

प्रदेश में जयपुर सहित कुछ हिस्सों में शुक्रवार को सर्दी से कुछ राहत मिली है। शुक्रवार को पहले की तुलना में आसमान साफ...

स्टार्टअप्स शुरू करने वालों से सीधे बातचीत करेंगे विशेषज्ञ

जयपुरस्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को समस्याओं के समाधान के लिए ज्यादा तनाव लेना नहीं पड़ेगा। अभी तक प्लेटफॉर्म और गाइडेंस नहीं मिलने...

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिग्री डिस्ट्रीब्यूशन सेरेमनी

जयपुरजेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी का पहला ई-कन्वोकेशन एवं फाउंडर डे का भव्य आयोजन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नए संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। आईआईटी मुम्बई...