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रंगाई का काम करने वाले 17 साल के सनी ने 3 जिंदगियों में भरे रंग, किडनी और लिवर देकर बचाई जान

  • सनी रंगाई का काम करता था, सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद ब्रेनडेड हो गया था
  • डॉक्टरों ने परिजनों से काउंसलिंग की, जिसके बाद अंगदान करने के लिए तैयार हुए

जयपुर न्यूज नेटवर्क

Feb 15, 2020, 04:21 AM IST

जयपुर. आर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट में राजस्थान और एसएमएस अस्पताल लगातार आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार को दौसा के युवक ने अंगदान कर 3 लोगों की जिंदगी बचाई। महज 17 साल के सनी ने किडनी, लिवर डाेनेट किए। जिनमें से दोनों किडनी एसएमएस अस्पताल में और लिवर निम्स हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट किया गया।

काउंसलिंग के बाद तैयार हुए परिजन
दौसा के बरखेड़ा गांव का सनी 8 फरवरी को सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। दौसा हॉस्पिटल से एसएमएस रेफर किया। शाम 7:30 बजे ट्रोमा में भर्ती किया, जहां 13 फरवरी को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। सोटो के चैयरमेन डॉ. सुधीर भंडारी, डा. मनीष शर्मा, डॉ. अजीत सिंह सहित अधीक्षक डॉ. डीएस मीणा और राम प्रसाद मीणा आदि ने परिजनों से काउंसलिंग की। इसके बाद मंत्री ममता भूपेश और विधायक मुरारीलाल मीणा ने परिजनों से बात की। अन्तत: परिजन अंगदान के लिए तैयार हो गए। इसके बाद 14 फरवरी को लिवर और किडनी दान किए गए।

रंगाई का काम करता था सनी
सनी गरीब परिवार से था और रंग-रोगन कर परिवार के पालन-पाेषण में अहम भूमिका निभाता था। अंतिम दिन (8 फरवरी) को भी सनी “रंग भर” काम से लौट रहा था, लेकिन सड़क दुर्घटना ने परिवार को एक अंधरे में धकेल दिया। गरीब होने के बावजूद परिजनों का इतना बड़ा दिल कि उन्होंने आर्गन डोनेशन के लिए हामी भर दी। जाते-जाते सनी तीन लोगों की जिंदगी में रंग भर गया।

रिसिपिएंट नहीं मिलने से नहीं हो सका हार्ट ट्रांसप्लांट

सनी की ओर से हार्ट डोनेट करने के बावजूद हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हो सका। वजह- पूरे देश में कोई भी हार्ट रिसिपिएंट नहीं मिला। एसएमएस अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की लिस्ट खंगाली गई, लेकिन क्रासमेच का कोई भी नहीं था। इसके बाद सोटो (स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) ने सभी अस्पतालों से संपर्क किया लेकिन कहीं भी सनी के दिल से क्रासमेच नहीं मिला। तुरंत नोटा (नेशनल स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) से संपर्क किया गया, लेकिन देश के किसी भी सरकारी-निजी अस्पताल में ऐसा कोई हार्ट के रिसिपिएंट का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। दुर्भाग्य- सनी का हार्ट खराब हो गया।
नियमों के मुताबिक जिसका रजिस्ट्रेशन नहीं है उसे अंग नहीं दिया जा सकता। एसएमएस के डॉक्टर्स ने आमजन से गुजारिश है कि बेहतर जिंदगी व्यतीत करने के लिए रजिस्ट्रेशन कराएं ताकि अंगदान की मुहिम सफल रहे।

यह भी संयोग

दो दिन पहले हार्ट, किडनी और लिवर डोनेट करने वाले आदित्य के पास वाला बेड ही सनी का था। सनी के पिता और भाइयों ने जब आदित्य के आर्गन डोनेट के बारे में पढ़ा और जाना तो वे भी काफी भावुक हो गए थे। बाद में डॉक्टर्स ने सनी के ब्रेनडेड के बारे में बताया और समझाया तो वे सहजता से मान गए।

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